भोपाल

भैंसवामाता मंदिर सारंगपुर में होली महोत्सव, स्वयं सहायता समूहों की रचनात्मकता बनी आकर्षण का केंद्र

भैंसवामाता मंदिर सारंगपुर में होली महोत्सव, स्वयं सहायता समूहों की रचनात्मकता बनी आकर्षण का केंद्र

भैंसवामाता मंदिर सारंगपुर में होली महोत्सव, स्वयं सहायता समूहों की रचनात्मकता बनी आकर्षण का केंद्र

भोपाल संभाग ब्यूरो रामस्वरूप वर्मा

भैंसवामाता मंदिर परिसर सारंगपुर में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा होली के अवसर पर रंगारंग होली महोत्सव एवं मेले का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के सभी ब्लॉकों से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज की। यह कार्यक्रम ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन के उद्देश्य से आयोजित किया गया। महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद श्री रोडमल नगर ने शिरकत की और मिशन के अंतर्गत कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। इस अवसर पर मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. इच्छित गढ़पाले, अनुविभागीय (राजस्‍व) अधिकारी श्रीमती निधि भारद्वाज, डिप्टी कलेक्टर डॉ. ज्योति राजोरे उपस्थित रहे।

 

साथ ही मेले की सबसे बड़ी विशेषता जिले के विभिन्न ब्लॉकों की महिला समूहों द्वारा लगाए गए विविध उत्पादों के स्टॉल रहे। जीरापुर ब्लॉक की महिलाओं ने पारंपरिक स्वाद के अनुरूप घरेलू स्नैक्स और होम डेकोरेशन सामग्री के आकर्षक स्टॉल लगाए, जिनमें हस्तनिर्मित सजावटी सामान और पैक्ड फूड आइटम शामिल थे। खिलचीपुर ब्लॉक के स्वयं सहायता समूहों ने पूरी तरह देसी पद्धति से तैयार किए गए। ऑर्गेनिक दालों और मसालों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया। जिससे ग्रामीण उत्पादों की गुणवत्ता और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिला। सारंगपुर पड़ाना से महिला समूह ने हैंडलूम और ब्यावरा से महिला समूह ने घरेलू श्रृंगार की प्रियदर्शिनी लगाई। नरसिंहगढ़ से महिला समूह ने घरेलू उत्पाद जैसे खिलौने, घी, मसाले और खाद की प्रदर्शनी लगाई। राजगढ़ ब्लॉक की महिला समूहों ने प्राकृतिक अवयवों से बने घरेलू गुलाल एवं अन्य हर्बल रंगों के साथ-साथ पारंपरिक घरेलू व्यंजनों के स्टॉल संचालित किए, जिससे स्वदेशी व सुरक्षित रंगों के उपयोग का संदेश दिया गया। इसके साथ ही ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) से प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद भी मेले में विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जो ग्रामीण कौशल विकास और उद्यमिता की सफल मिसाल प्रस्तुत करते हैं।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से न केवल परिवार की आय में वृद्धि होती है, बल्कि गांवों की सामाजिक–आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के मेलों से महिला समूहों को बाज़ार की समझ, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ग्राहक से सीधे संवाद का अनुभव प्राप्त होगा, जो उन्हें आगे चलकर सफल उद्यमी के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा। होली महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोकगीतों और पारंपरिक होली गीतों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को उल्लासमय बना दिया। पूरे कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से संगठित स्वयं सहायता समूह, परंपरा, संस्कृति और आधुनिक ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ जोड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

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