20 वर्षों से शिक्षा विभाग को कथित रूप से चूना? विकलांग कोटे में भर्ती पर उठे सवाल
20 वर्षों से शिक्षा विभाग को कथित रूप से चूना? विकलांग कोटे में भर्ती पर उठे सवाल

20 वर्षों से शिक्षा विभाग को कथित रूप से चूना? विकलांग कोटे में भर्ती पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक मामला चर्चा में है, जिसमें एक शिक्षक की नियुक्ति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2006 में संबंधित व्यक्ति ने विकलांग कोटे के तहत नियुक्ति प्राप्त की।
सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति के समय प्रस्तुत किया गया विकलांगता प्रमाणपत्र संदिग्ध बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को मामूली दुर्घटना में चोट लगी थी, जिससे वह बाद में पूरी तरह स्वस्थ हो गया, इसके बावजूद स्थायी विकलांगता प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की गई।
वर्तमान में संबंधित शिक्षक प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें 55,000 रुपये से अधिक का वेतन मिल रहा है। मामले में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। संबंधित विभागों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि वास्तविक दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकारों पर भी प्रभाव डालेगा।
इस पूरे मामले का विस्तृत खुलासा जल्द ही सिर्फ एम पी दर्पण न्यूज छत्तीसगढ़ पर।




