दामजीपुरा

हम हैं धरती के दूत’ के संकल्प के साथ वन परिक्षेत्र मोहदा में संपन्न हुआ ‘अनुभूति’ कार्यक्रम

हम हैं धरती के दूत’ के संकल्प के साथ वन परिक्षेत्र मोहदा में संपन्न हुआ ‘अनुभूति’ कार्यक्रम

हम हैं धरती के दूत’ के संकल्प के साथ वन परिक्षेत्र मोहदा में संपन्न हुआ ‘अनुभूति’ कार्यक्रम

वन परिक्षेत्र मोहदा (सामान्य) में दिनांक, 9 जनवरी 2026 को प्रकृति से परिचय कराने वाले विशेष ‘अनुभूति’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शिविर में शासकीय हाई स्कूल मोहदा, चिल्लौर और सांदीपनी विद्यालय पिपरिया के लगभग 131 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और प्रकृति संरक्षण की शपथ लेते हुए पूरे जोश के साथ “हम हैं धरती के दूत” का नारा बुलंद किया।

जंगल की पाठशाला में सीखा संरक्षण का पाठ

शिविर की शुरुआत जंगल के बीच ‘नेचर ट्रेल’ से हुई, जहाँ मास्टर ट्रेनर्स श्री भगवंतराव भौंरपी, परिक्षेत्र अधिकारी श्री रविन्द्र पाटीदार एवं अन्य वन विभाग कर्मचारीयो ने बच्चों को जैव विविधता से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने वन्य प्राणियों के रहन-सहन, उनके पदचिह्नों और औषधीय पौधों की पहचान करना सीखा। वन अधिकारियों ने बताया कि आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

प्रतियोगिताओं के माध्यम से दिखाई प्रतिभा

इस दौरान विद्यार्थियों के लिए क्विज, चित्रकला और संवाद सत्र आयोजित किए गए *इसी दौरान कार्यक्रम में सम्मिलित हुये अतिथि अनिलजी राठौर के द्वारा वृक्ष लगाने एवं उनका निष्ठांपूर्वक पालन पोषण करने हेतु सभी को प्रेरित किया एवं श्री अंबाराम जी धाकड़ द्वारा बच्चों को भगवान बिरसा मुंडा के द्वारा निभाए गए राष्ट्र धर्म एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए किये गए प्रयासों को अपने जीवन में आत्मसात करने हेतु प्रेरित किया।* बच्चों ने न केवल जंगल की बारीकियों को समझा, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों पर भी चर्चा की। समापन के दौरान विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से “हम हैं धरती के दूत” का संकल्प लिया, जिसका अर्थ है कि अब वे अपने क्षेत्र में पेड़ों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए एक सजग प्रहरी की भूमिका निभाएंगे।

पुरस्कार वितरण के साथ हुआ समापन- 

विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। स्कूल के शिक्षकों ने वन विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ इस तरह के व्यावहारिक अनुभव बच्चों के मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

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