गुप्तेश्वर मंदिर में चल रही श्री राम कथा के आठवें दिन माता सीता, अनसुइया का प्रसंग सुनाया
गुप्तेश्वर मंदिर में चल रही श्री राम कथा के आठवें दिन माता सीता, अनसुइया का प्रसंग सुनाया

गुप्तेश्वर मंदिर में चल रही श्री राम कथा के आठवें दिन माता सीता, अनसुइया का प्रसंग सुनाया
हरदा से ब्यूरो चीफ गोपाल शुक्ला
हरदा गुप्तेश्वर मे चल रही राम कथा का आज आठवें दिन में आचार्य जी ने जयंत प्रसंग सीता अनसुइया प्रसंग अगस्त ऋषि द्वारा भगवान को दिव्य अस्त्र शस्त्र का ज्ञान देने की पचवटी में परण कुटी सुपर्णखा की नाक काटने खर दूषण वध और रावण के दरबार में सुपर्णकाखा में विलाप करने की प्रेरक कथा पंडित नंदलाल पांडे द्वारा बड़े ही भाव पूर्ण से कथा का वाचन किया गया ।।इंद्र के पुत्र जयंत को जब भगवान श्री राम के समर्थ का परिचय लेने के लिए मां सीता के पैरो में कौवे का रूप लेकर जब चोंच से प्रहार किया गया तब भगवान ने घास के तिनके को बाण बनकर इसके पीछे छोड़ा तो बह सभी देवता के पास बचाने की पुकार लगाते है पर कोई भी उसे आश्रय नही तब देवर्षि नारद की सलाह से भगवान श्री राम की शरण में जाने पर भगवान उसे एक नेत्र का कर अभयदान देते है । अनसुइया माता द्वारा माता सीता को दिव्य वस्त्र और आभूषण प्रदान किए जाते है और पतिब्रत की सिख देती है जिसका बड़ा सुंदर वर्णन कथा वाचक द्वारा किया गया।अगस्त ऋषि द्वारा भगवान श्री राम को दिव्य अस्त्र शस्त्र का ज्ञान देकर आदित्य स्त्रोत का ज्ञान दिया ।पंचवटी कथा सुपर्णखा के द्वारा सीता को डराने पर लक्ष्मण द्वारा नाक काटने खर दूषण के वध और रावण के द्वारा प्रतिशोध लेने की कथा का बड़ा भाव पूर्ण वर्णन किया ।।श्री राम कथा से जुड़े अनिल वैद्य ने बताया कि मंदिर में चल रही कथा का वाचन प्रतिदिन 2 बजे से पांच बजे तक किया जाता है ।।कल कथा की पूर्ण आहुति का दिन है ।।सभी भक्तो से निवेदन किया गया है की कल श्री राम कथा के समापन पर सभी भक्तगण उपस्थित होकर कथा का पुण्य लाभ लेवे ।।




