भीमकुंड आज भी एक रहस्य बना हुआ हैं जहाँ वैज्ञानिक भी नही डूड पाये भीमकुंड का रहस्यमयी इतिहास
भीमकुंड आज भी एक रहस्य बना हुआ हैं जहाँ वैज्ञानिक भी नही डूड पाये भीमकुंड का रहस्यमयी इतिहास

भीमकुंड आज भी एक रहस्य बना हुआ हैं जहाँ वैज्ञानिक भी नही डूड पाये भीमकुंड का रहस्यमयी इतिहास
एम पी दर्पण से ब्यूरो चीफ गोपाल शुक्ला
भीमकुंड एक रहस्यमयी जलकुंड है, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है और इसका रहस्य आज तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।मान्यता है कि महाभारत काल मेंपांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय यहां कुछ समय बिताया था, और द्रौपदी की प्यास बुझाने के लिए भीम ने अपनी गदा से धरती पर प्रहार कर इस कुंड का निर्माण किया था भीमकुंड का रहस्य भीमकुंड की सबसे बड़ी रहस्यमयी बात इसकी गहराई है, जिसे आज तक मापा नहीं जा सका है और वैज्ञानिक भी इसका अंतिम तल खोजने में नाकाम रहे हैं कुंड का पानी अतिशय नीला और साफ रहता है, और माना जाता है कि इसका कोई गुप्त जल-स्रोत है जो समुद्र से जुड़ा हो सकता है।यह भी प्रसिद्ध है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा या बड़े हादसे से पहले इस कुंड के पानी में हलचल बढ़ जाती है, जिसे लोग चेतावनी संकेत मानते हैं भीमकुंड के पानी को गंगाजल जितना ही पवित्र माना जाता है और मान्यता है कि इसमें स्नान करने से त्वचा संबंधी रोग ठीक हो जाते हैं अज्ञातवास का संबंध अज्ञातवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में घूम रहे थे, तभी द्रौपदी को प्यास लगी पानी न मिलने पर, भीम ने अपनी गदा से चट्टान पर प्रहार किया, जिससे गहरा छेद हो गया और जलधारा फूट पड़ी-यही भीमकुंड कहलाया जल अत्यंत गहराई में था, इसलिए यह कथा भी प्रचलित है कि अर्जुन ने बाणों के माध्यम से पानी तक पहुँचने के लिए सीढ़ियां बनाई पौराणिक महत्व एवं स्थानीयमान्यताएँभीमकुंड न केवल रहस्यमयी है, बल्कि धार्मिक आस्था का केंद्र भी है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यहां के जल की तीन बूंद भी पी ली जाए तो प्यास बुझ जाती है अज्ञातवास और महाभारत काल का यह प्रमाणित स्थल स्थानीय संस्कृति, मेले, और धार्मिक आयोजनों के केंद्र में रहता है ।
भीमकुंड की रहस्य और पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी यह कथा इसे भारत के सबसे अनूठे और चमत्कारी तीर्थों में शामिल करती है, और इसकी गहराई तथा जल-स्रोत आधुनिक विज्ञान के लिए भी अबूझ पहेली बना हुआ है




