आनंद को-ऑपरेटिव हाउसिंग घोटाला; जांच पूरी — मुख्याधिकारी भारत नंदनवार पर भी संदेह की सुई
आनंद को-ऑपरेटिव हाउसिंग घोटाला; जांच पूरी — मुख्याधिकारी भारत नंदनवार पर भी संदेह की सुई

आनंद को-ऑपरेटिव हाउसिंग घोटाला; जांच पूरी — मुख्याधिकारी भारत नंदनवार पर भी संदेह की सुई
एमपी दर्पण न्यूज रिपोर्टर : नीलम चकोले
वानाडोंगरी में भी अवैध मदद के आरोप; सहकार विभाग में हड़कंप
हिंगणा : नागपुर ग्रामीण क्षेत्र की आनंद को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि को अवैध रूप से बेचने के मामले में जांच पूरी हो चुकी है और संबंधित दोषियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज़ी से शुरू हो गई है, ऐसी जानकारी विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त हुई है। इस प्रकरण में सहायक निबंधक के निलंबन के बाद अब तत्कालीन मुख्याधिकारी भारत नंदनवार की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित लगभग 11,107 वर्गफुट भूमि की बिक्री के दौरान सोसायटी पदाधिकारियों को प्रशासनिक स्तर से संरक्षण मिला होने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने नियमों के विरुद्ध अनुमति प्रदान कर, नक्शों में बदलाव कर तथा दस्तावेजों की प्रक्रिया को आसान बनाकर इस अवैध लेन-देन को वैधता का रूप दिया।
इस बीच, भारत नंदनवार ने पूर्व में वानाडोंगरी नगर परिषद क्षेत्र में भी लंबे समय तक सेवा दी थी। उस दौरान सहकार गृह निर्माण सहकारी संस्था, नागपुर को भूमि एवं आरक्षण से जुड़े मामलों में नियमबाह्य सहायता देने की शिकायतें फिर से चर्चा में आ गई हैं। स्थानीय नागरिकों एवं पूर्व पदाधिकारियों के अनुसार, आरक्षित भूमि के वर्गीकरण में बदलाव, नक्शों में संशोधन तथा मंजूरी प्रक्रिया में असामान्य तेजी दिखाकर संबंधित संस्था को लाभ पहुंचाया गया।
बताया जा रहा है कि आनंद सोसायटी घोटाले की जांच के दौरान वानाडोंगरी नगर परिषद से जुड़े इन मामलों का भी उल्लेख हुआ है। इसके चलते जांच का दायरा बढ़ाकर भारत नंदनवार के कार्यकाल में लिए गए सभी भूमि एवं सहकार विभाग से संबंधित निर्णयों की पुनः जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
सहकार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
इस प्रकरण के कारण नागपुर ग्रामीण तथा वानाडोंगरी क्षेत्र में सहकारी संस्थाओं के कार्यों को लेकर भारी अविश्वास का माहौल बन गया है। नागरिकों की ओर से आरक्षित सार्वजनिक भूमि की बिक्री एवं रूपांतरण से जुड़े मामलों की राज्यस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।




