बुटीबोरी MIDC प्रकरण सकारात्मक चरण में; श्रमिकों की मांगों पर प्रशासन की त्वरित संज्ञान
बुटीबोरी MIDC प्रकरण सकारात्मक चरण में; श्रमिकों की मांगों पर प्रशासन की त्वरित संज्ञान

बुटीबोरी MIDC प्रकरण सकारात्मक चरण में; श्रमिकों की मांगों पर प्रशासन की त्वरित संज्ञान
सुरक्षा रक्षकों के बकाया वेतन का मामला समाधान की दिशा में; सभी संबंधित स्तरों पर समन्वय प्रारंभ
एमपी दर्पण न्यूज के लिये रिपोर्टर – नीलम चकोले
नागपुर : बुटीबोरी MIDC स्थित Vidarbha Industries Power Limited (प्लांट क्रमांक D-3) में कार्यरत सुरक्षा रक्षकों के बकाया वेतन से संबंधित मामला अब सकारात्मक और कानूनी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। यह परियोजना पहले Reliance Industries समूह के अंतर्गत थी, जबकि वर्तमान में यह Adani Group के अंतर्गत कार्यरत है।
सुरक्षा रक्षक देवानंद नामदेव चकोले (निवासी – कान्होलीबारा, तहसील हिंगणा) ने अपने प्रभावित साथियों के साथ माननीय विधायक समीर मेघे (हिंगणा विधानसभा) तथा मुख्यमंत्री सचिवालय, नागपुर की सहसचिव आशा पठाण के पास लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। इस शिकायत को संज्ञान में लेते हुए नागपुर में दिनांक 2 जुलाई 2024 से कार्यरत अपर श्रम आयुक्त किशोर दहीफळकर के पास भेजा गया।
दिनांक 11 फरवरी 2026 को पीड़ित श्रमिकों ने अपर श्रम आयुक्त किशोर दहीफळकर से प्रत्यक्ष भेंट कर न्याय की मांग की। इस अवसर पर सहायक श्रम आयुक्त श्री यू. सु. लोया भी उपस्थित थे। दहीफळकर ने तुरंत Vidarbha Industries Power Limited के अंतर्गत कार्यरत अधिकारियों से संपर्क साधते हुए S.R. मैनेजर विवेक पाठक से दूरभाष पर चर्चा की और मामले में उचित कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन किया।
शिकायत के अनुसार Intelligence Security Force, Prime Guard, New J.B. Enterprises एवं BIS Security इन ठेका एजेंसियों के माध्यम से सुरक्षा रक्षकों की नियुक्ति की गई थी। वेतन की बकाया राशि तथा PF (भविष्य निधि) से संबंधित मामलों में सभी अभिलेखों की जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, ऐसा प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है।
इस सकारात्मक चर्चा के बाद कामगार देवानंद चकोले, सुरेश रामटेके, रविंद्र भगत, दिलीप मसराम, विलास शेंडे सहित अन्य उपस्थित श्रमिकों ने समाधान व्यक्त किया तथा संबंधित विभाग के माध्यम से नियमानुसार न्याय मिलने का विश्वास जताया। श्रम विभाग की समन्वयात्मक भूमिका के कारण यह मामला कानूनी दायरे में और पारदर्शी तरीके से सुलझेगा, ऐसी आशा व्यक्त की जा रही है।




