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क्षमा ही सबसे बड़ा धर्म – क्षमा वाणी पर्व 2025 में स्वास्थ्य मंत्री ने दी प्रेरणा

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और क्षमा प्रार्थना के साथ चिरिमिरी में क्षमा वाणी पर्व सम्पन्न

क्षमा ही सबसे बड़ा धर्म – क्षमा वाणी पर्व 2025 में स्वास्थ्य मंत्री ने दी प्रेरणा

चिरिमिरी में जैन समाज ने भव्यता से मनाया क्षमा वाणी पर्व, अतिथियों ने भी मांगी क्षमा

मिच्छामि दुक्कड़म्’ की गूँज के बीच क्षमा वाणी पर्व सम्पन्न, मंत्री ने भवन की मांग को किया स्वीकार

क्षमा केवल एक दिन की औपचारिकता नहीं, जीवन का आधार है – श्याम बिहारी जायसवाल

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और क्षमा प्रार्थना के साथ चिरिमिरी में क्षमा वाणी पर्व सम्पन्न

क्षमा वाणी पर्व 2025 : क्षमा ही सबसे बड़ा धर्म – स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

एमसीबी से कैलाश गिरी की रिपोर्ट

छोटा बाज़ार, चिरिमिरी।

सकल दिगंबर जैन समाज, चिरिमिरी द्वारा सामुदायिक भवन छोटा बाज़ार में क्षमा वाणी पर्व 2025 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महापौर नगर पालिक निगम चिरिमिरी राम नरेश राय, एमआईसी सदस्य नरेंद्र साहू तथा जैन समाज के वरिष्ठजनोें ने भगवान महावीर की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर विधिवत पूजा-अर्चना से किया।

इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। मंच पर विराजमान अतिथियों का पारंपरिक स्वागत माथे पर तिलक-चंदन लगाकर एवं जैन ध्वज पहनाकर किया गया। इस अवसर पर नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आकर्षक और अद्भुत प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्हें देखकर उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गए। मुख्य अतिथि श्री जायसवाल सहित अन्य अतिथियों ने प्रतिभाशाली बच्चों को मंच से पुरस्कृत भी किया

जैन समाज की मांगें और मंत्री का आश्वासन –

इस अवसर पर जैन समाज ने 10 लाख रुपए के भवन और 2 लाख रुपए के टाइल्स की मांग रखी। मंत्री श्री जायसवाल ने इस मांग को सहर्ष स्वीकारते हुए इसे शीघ्र पूरा कराने का आश्वासन दिया।

क्षमा का महत्व – सिर्फ़ औपचारिकता नहीं

अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा –

“सिर्फ़ एक दिन क्षमा मांग लेने से क्षमा की सार्थकता पूरी नहीं होती। इसे बार-बार दोहराने की आवश्यकता है। सनातन धर्म में भी क्षमा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। क्षमा जीवन का आधार है और इसे स्थायी रूप से आत्मसात करना ही वास्तविक धर्म है।”

उन्होंने एक संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए क्षमा दान के महत्व को समझाने का प्रयास किया। साथ ही उदाहरण देते हुए कहा –

“जब हम सुबह उठते हैं, तो मन दो राहों पर खड़ा रहता है – एक ओर हमें शीघ्र उठकर स्नान-पूजा कर अपने नियमित दिनचर्या का पालन करने की प्रेरणा देता है, वहीं दूसरा मन आलस्य और आराम की ओर खींचता है। ऐसे में यह हम पर निर्भर है कि हम किस राह को चुनते हैं। क्षमा भी इसी प्रकार है – केवल क्षमा मांगना ही धर्म नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में स्थायी रूप से उतारना ही वास्तविक साधना है।”

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